मप्र के कृषि वैज्ञानिकों ने खोली भरपूर पाषण देने वाले गेहूं की किस्में

-इंदौर के महू अनुसंधान केंद्र ने लंबे शोध के बाद किया तैयार
भोपाल। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के इंदौर स्थित क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केंद्र में गेहूं की चार प्रजातियों को विकसित किया गया है। जो पैदावार में अव्वल रहने के साथ ही पोषण से भी भरपूर होंगी। इनका नाम पूसा ओजस्वी, पूसा हर्षा, पूसा पौष्टिक और पूसा कीर्ति है। लंबे शोध के बाद इन किस्मों को मध्य भारत क्षेत्र के लिए तैयार किया गया है। पूसा पौष्टिक प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए भी उपयोगी होगी, जो जल्द ही गेहूं उत्पादक राज्यों के खेतों में लहलहाती दिखेगी।
कृषि विज्ञानी केसी शर्मा का कहना है कि गेहूं की यह प्रजातियां मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान के कोटा, उदयपुर और उत्तर प्रदेश के झांसी संभाग के लिए उपयोगी होंगी। चारों किस्मों की क्वालिटी और पोषण तत्वों की जांच करनाल स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र में पूरी हो चुकी है। चारों किस्में पोषक तत्वों के कारण महत्वपूर्ण होंगी। इनमें प्रोटीन, जस्ता, लोहा जैसे कई पोषक तत्व रहेंगे, जबकि कठिया की दो किस्में पूसा पौष्टिक और पूसा कीर्ति में पीला वर्णक (यलो पिगमेंट) भी भरपूर मिलेगा। यह तत्व आंखों की रोशनी के लिए उपयोगी रहता है।

अगले सीजन से किसानों को मिलेंगी नई किस्म
नोटिफिकेशन की प्रक्रिया एक सप्ताह में पूरी हो जाएगी। किसानों को आगामी सीजन से यह किस्में उपलब्ध हो सकेंगी। अभी अनुसंधान केंद्र में इसके बीज तैयार किया जा रहे हैं। कुछ किसानों को सैंपल के तौर एक-दो किलो बीज उपलब्ध कराए गए हैं। मोटे तने और कम लंबाई के कारण फसलें जमीन पर नहीं लेटेंगी और खूब पैदावार होगी।

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